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अपने संघर्ष के दिनों

अपने संघर्ष के दिनों की कठिनाई भरी पोटली मन के भीतर गहरी दबा कर रखी हैँ क्योंकि दुःख की संचित पूंजी सिर्फ हमारी अनमोल धरोहर हैँ वहीं दूसरी और सुख के दिनों का प्रसाद सब मै बाँटते रहे यहीं जीवन का सार हैँ,,, ईश्वर भी यहीं राह दिखाते हैँ की ज़ब आप सम्पन्नता की और अग्रसर हैँ तो अपने लोगों के खुशी के पलो को बढ़ाने की कोशिश रखे क्योंकि खुशियाँ और सम्पन्नता जितनी बांटो बढ़ती जाएंगी ,,,,,, क्योंकि ईश्वर उन्हें ही देते हैँ जो दया करुणा और इंसानियत के कारवां को आगे बढ़ावा देते हैँ,,,,, अगर आप लायक हुए हैँ तो पहले घर परिवार मै मदद कीजियेगा अपने भाई बंधुओ को सहारा दें, फिर किसी अन्य जरूरत मंद को। बड़े भाग्यशाली हैँ वो जो निमिष मात्र भी किसी के काम आ जाये,,,संघर्ष के दिन प्रेरणा का जीवंत स्वरूप होते हैँ और ये सिर्फ और सिर्फ हमारी निजी पूंजी होती हैँ क्योंकि हरेक जीवनमात्र की अपनीअलग जीवन दृष्टि, अपने अलग संघर्ष और अपने अलग नजरिये होते हैँ,, हम अपने संघर्ष को आने वाली पीढ़ी पर थोप नहीं सकते क्योंकि उनके कालखंड के अपने संघर्ष होंगे,,, हमारे माता पिता का अपना संघर्ष था हमारे अपने हैँ हमारे बच्चों के अलग होंगे!!!हर पीढ़ी की विलग सोच और नजरिया होता हैँ किसी पर ऊँगली उठाना जायज नहीं होगा। उनकी अपनी राहे होती हैँ जरूरी नहीं हमारी राह पकड़े तभी मंजिल मिले नित नए रास्ते खोजे जा सकते हैँ,,,, धैर्य, भरोसा और विश्वास बनाये रखे। प्रेरित करें परंतु धक्का न दें, मौका दें ताने न कसे हर दौर उत्तम से सर्वोतम की और अग्रसर होने का प्रयास करता हैँ,, नए युग की पतवार बनने की कोशिश कर सकते हैँ नाविक तो नई पीढ़ी खुद ही बन जाएंगी,,,,,,, पुराना ठहरेगा तभी नवीन को बहाव मिलेगा

 
 
 

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