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धर्म की राह...जीवन पद्द्ति
क्या है धर्म या फिर यूँ कहे की आज के युग मे क्या परिभाषा बन गई है धर्म की कर्म की! क्या बस मंदिर जाना कर्मकांड जो दुनियां कर रही है देख वैसे ही करना... ये अनुसरण ही पुजा पाठ और पद्द्ति बनते जा रहे है?न नियम न संस्कार न वैदिक परम्परा बस पुजा करने का दिखावा मात्र बना दिया है धर्म को!! धर्म और कर्म आधारित जीवन शैली का वर्णन वेदों मे शास्त्रों मे जीवन को उत्तम से सर्वोतम बनाने वाला बताया गया है जँहा कर्म का प्रभाव धर्म को पूरा करने वाला होता है, फर्ज की सीमा कर्म और धर्म दोनों से
pushpavashishtrani
Mar 152 min read
जिस दौड़ का कोई अंत नहीं
दौड़ रहा.. मानव दौलत के उस खजाने के लिए जिसके लिए अपनों को छोड़ा.और छोड़ कर ही कमाने निकला... अपनों के लिए ही कमाना है पर कमा ले ज़ब दौलत तो कहीं ख़र्च ना कर दें उन्हीं अपनों से ही बचाना है! न उनके मन की इच्छाये को पूरी करने मे ये दौलत लगने देंगे और ना होंगी आपके खुद के मन की इच्छा होंगी पूरी...क्योंकि हर इच्छा है एक दूसरे की नज़र मे गेरज़रूरी!!!चाहें थोड़ा सा ही कमा ले पर उसे अपनों के साथ अपनेपन से हर पल को जीते हुऐ बिताये!क्योंकि ज्यादा कमा कर ज्यादा दम्भ मे भर लेगा खुद को और
pushpavashishtrani
Mar 152 min read
जीवन का परम धर्म "मानवता "
रची है सृष्टि उस परब्रह्म ने तो कुछ अति श्रेष्ठ सोच कर ही सब कृति बनाई होंगी क्योंकि उनका रचा कुछ भी मिथ्या या बिना किसी कारण के नहीं होता। उनकी हर रचना का कोई न कोई प्रारब्ध या नियति होती है अनंत कोटि ब्रमांड की अनंत कोटि सृष्टियों मै हम इस धरती के जीव भी शामिल है। मानव रूपी जीव को सबसे उत्कृष्ट और सबसे संवेदना भरा बना उसमें मानवता का खजाना सभी जीवो से अधिक दिया है परब्रह्म ने जो हमें सभी जीवों मे सबसे अलग बनाता है। यहीं एक पूँजी हमें समस्त सृष्टि मै श्रेष्टम और सभी जीवो पर
pushpavashishtrani
Mar 152 min read
व्यवहार और शांत चित
अपने व्यवहार मे गुस्सा, तल्ख़ टिपण्णी और, सख्त रवैया थोड़ा कम ही रखे तो अच्छा हैँ क्योंकि आस पास के माहौल को भी तुरंत नकारात्मक कर देते हैँ ऐसे भाव लिए लोगो को समझना होगा कि हमेशा अपने आस पास के माहौल को खुशमिजाज दिल से हल्का और सौहार्द पूर्ण रखना चाहिए ताकि घर और बाहर आप जिंदगी का सुंदर सहज आंनद दें और ले सकें,,, कुछ लोग दूसरे के सामने तो ख़ुश और जिंदादिल होने का मुखौटा पहने रहते हैँ पर घर वालो के लिए अजीब सा व्यवहार रखते हैँ ऐसे लोग घर कि ख़ुशी का खुद ही ग्रहण बन जाते हैँ,,,, प
pushpavashishtrani
Mar 151 min read
कवच दुवाओं का
देखा है मैंने कठिन से कठिन दौर और जीवन की कड़ी धुप मै भी ईश्वर का आशीर्वाद और अपनों की दुवाओं को अपने साथ साथ चलते हुए 🥰महसूस किया है सदा अपनों के प्रेम स्नेह भरे अहसासों को हर संकट और कष्ट के समय मै दुवाओं और आशीर्वाद के कवच को रक्षा करते देखा है 🥰कमाया है अपनों का स्नेह, सम्मान और मान करने के साथ सबके लिए दिल मै दया ममता करुणा का और छोटे बड़े सभी की इज्जत करने का अनमोल खजाना ये वो धन है जितना बाँटे उतना कल्प वृक्ष सा बढ़ता ही जाता है,,,,,, लगा लीजिये अपने अपने जीवन मै ये "कल
pushpavashishtrani
Mar 151 min read
बारिश जीवन अमृत की
बारिश का मौसम इस सृष्टि के लिए अपने भीतर की ऊर्जा को सहेजने के लिए होता हैँ। ये प्रकृति की हिलिंग का समय हैँ ज़ब वो सर्दी और गर्मी के कठोर वातावरण को झेल अपने आप को दुबारा जीवन के सौंदर्य, प्रेम, दुलार के भाव से पुनः जीवंत और ऊर्जावान बना फिर से मृत कोशिकाओ को बुनती हैँ। जैसे कोई गाड़ी सर्विसिंग के लिए जाए और फिर से परफेक्ट हो वापिस आये। सोचिये जब सृष्टि अपने आप को अपनी प्रकृतिक सुंदरता को वापिस सहजने के निरंतर प्रयासों मे जुटी हैँ महीनों सर्द और गर्म हवाओं के थपेड़े सहने के बाद
pushpavashishtrani
Mar 152 min read
फल की इच्छा करो या न करो वो कर्म से मिलेगा जरूर
आज के युग की भयावह सच्चाई हैँ बैठे बिठाये बस सब मिलता जाये न कोई फर्ज निभाना, न अपने कर्म ही करने पड़े, हक़ सारे चाहिए। करने के टाईम पर हमारे सारे फर्ज हम भूल जाते हैँ एक छोड़ो सत्तर बहाने याद आते हैँ पर जब लेने और लूटने की बारी आती हैँ तो लाईन मै सबसे पहले खड़े नज़र आते हैँ!!!ये कैसी रीत चली जगत मै बिन कर्म फल सारे चाहिए। और सबसे बड़ी विडंबना हमें हमारी अंतरात्मा भी झझोड़ती नहीं,,,, कैसे हजम हो जाता हैँ जो बिना फर्ज और कर्म के छीना या मिला। बिना कर्मो के फल की गठरी जो लाद लीं कांध
pushpavashishtrani
Mar 152 min read
सही दिशा
अपने बच्चों को सबसे आसान तरीके से समझाना चाहते हैँ हम सभी।अक्सर हम शिक्षा प्रद बातें बता कर या उपदेश देकर उन्हें समझाते हैँ ताकि वो जीवन मै गलत न बने और न ही कुछ गलत करें। हर कोई चाहता हैँ उसके बच्चें उत्तम जीवन शैली और कर्म का निर्वहन करें इसमें कोई बुराई भी नहीं परंतु शायद समझ ही नहीं पाते की ये तरीका ही गलत हैँ उपदेशात्मक भाषा या भाषण किसी को अच्छा नहीं लगता बच्चों को तो हरगिज नहीं उन्हें तो खुद उदाहरण बन उनके सामने अपना आचरण श्रेष्ठ रख और व्यव्हार से मधुर भाषी और कर्तव
pushpavashishtrani
Mar 151 min read
परम सत्य जीवन
ईश्वर के दिये इस जीवन को हर हाल और हर परिस्थिति मै अगर मन से संतुष्ट हो जी लिया जाये और हर हालात को हरि इच्छा का प्रसाद मान उसी भाव मै खुद को ढाल लिया जाये तो पूर्ण समर्पण ही है जीव का परमात्मा के लिए। ऐसे प्राणी न तो स्वमं दुःखी होते है न किसी के दुःख का कारण बनते है। वरना आधा जीवन तो ये बताने मै निकाल देते है इसने ये क्यों किया ये क्यों कहा ऐसे वैसे जाने कैसे कैसे बस दूसरे की गलतियां ढूंढने और बताने मै व्यर्थ जीवन जाया,,,,,, मानव बस मानवता छोड़ बाकि हर बात को पकड़े मिलेगा और
pushpavashishtrani
Mar 151 min read
खुशियाँ
असल मै खुशियाँ क्या हैं? जब हम आत्मिक और मानसिक रूप से प्रसन्न महसूस करे वहीँ खुशी हैं। जो सुकून हम हर दिन पल छीन जीते हैं एक वहीँ सच्ची खुशी हैं जो पल हँसते मुस्कुराते कट जाये और हम किसी के आँसू का नहीं हँसी का कारण बने बस इसी को जीवन का असल आनंद और ख़ुशी माने..बाकि तो खाली मन की चाहते हो सकती हैं खुशियाँ नहीं.. अक्सर हम सोचते है मुझे ख़ुशी तभी मिलेंगी जब मे पैसे कमाने लगूं बिज़नेस या नौकरी बढ़िया हो, घर हो संतान हो परंतु आपने देखा होगा तब कोई और कारण होते है ख़ुशी मे बाधा के...
pushpavashishtrani
Mar 151 min read
" परिवार का बदलता परिपेक्ष "
जितना छोटा होता गया परिवार उतने छोटे होते गए मूल्य और संस्कार। यहीं सच्चाई हैं जैसे जैसे हम अपने दायरो को सिकोड़ते गए उतने ही अपनों के अपनेपन से वंचित होते गए.. पहले लोग जॉइट फॅमिली से अलग अपना परिवार बसाना चाहते थे ताकि अपने बच्चों का लालन पालन अपनी सुविधा अनुसार कर सकें लगता था की वो परिवार से विलग होकर ही संभव होगा,, इसलिये परिवार जो दादा दादी ताऊ ताई चाचा चाची बुआ बहनों भाइयों से भरे थे वो टूट कर मै और मेरे बच्चे तक आ गए थे!!परंतु अब के समय की विडंबना देखिये की जिन बच्चों
pushpavashishtrani
Mar 152 min read
धर्म की राह....जीवन पद्द्ति
क्या है धर्म या फिर यूँ कहे की आज के युग मे क्या परिभाषा बन गई है धर्म की कर्म की! क्या बस मंदिर जाना कर्मकांड जो दुनियां कर रही है देख वैसे ही करना... ये अनुसरण ही पुजा पाठ और पद्द्ति बनते जा रहे है?न नियम न संस्कार न वैदिक परम्परा बस पुजा करने का दिखावा मात्र बना दिया है धर्म को!! धर्म और कर्म आधारित जीवन शैली का वर्णन वेदों मे शास्त्रों मे जीवन को उत्तम से सर्वोतम बनाने वाला बताया गया है जँहा कर्म का प्रभाव धर्म को पूरा करने वाला होता है, फर्ज की सीमा कर्म और धर्म दोनों से
pushpavashishtrani
Mar 152 min read
"स्त्री "
ब्रह्माण्ड का जीवंत स्वरूप स्त्री जो निर्माण और सृजन कर्ता हैं जीवन की,,,,जीवनदायनी, पोषक, पालक और हर मानव की प्रथम शिक्षक भी मातृ शक्ति ही हैं।स्त्री हर भूमिका सहज ही निभा लेती है ..चाहें कुछ न आता हो पढ़ी- लिखी या अनपढ़ ही क्यों न हो परंतु अपने कार्यों मे सर्वदा संपूर्ण और सर्वोच्च रही हैं वो सदा। परंतु त्रासदी देखिये सदा कमतर और निम्न समझी गई उसी समाज और पुरुष द्वारा जिसे उसी ने जन्म देकर काबिल होने की राह दिखाई,,, ये संसार और सांसारिक ताना बाना उसी की प्रतिकृतियों से भरा
pushpavashishtrani
Mar 152 min read
अपने संघर्ष के दिनों
अपने संघर्ष के दिनों की कठिनाई भरी पोटली मन के भीतर गहरी दबा कर रखी हैँ क्योंकि दुःख की संचित पूंजी सिर्फ हमारी अनमोल धरोहर हैँ वहीं दूसरी और सुख के दिनों का प्रसाद सब मै बाँटते रहे यहीं जीवन का सार हैँ,,, ईश्वर भी यहीं राह दिखाते हैँ की ज़ब आप सम्पन्नता की और अग्रसर हैँ तो अपने लोगों के खुशी के पलो को बढ़ाने की कोशिश रखे क्योंकि खुशियाँ और सम्पन्नता जितनी बांटो बढ़ती जाएंगी ,,,,,, क्योंकि ईश्वर उन्हें ही देते हैँ जो दया करुणा और इंसानियत के कारवां को आगे बढ़ावा देते हैँ,,,,, अगर
pushpavashishtrani
Mar 152 min read
"भक्ति का मर्म "
अपने अंदर की शुद्धि,,, भक्ति का पहला भाव ही है दोषी हूँ, निर्गुण हूँ, पापी हूँ हे नाथ!मेरे दोषों को भुला मेरे सिर पर दया का अपना हाथ रखना 🙏🌹परंतु आज के युग का भाव देखो प्रभु मै तो बहुत अच्छा था मै तो बढ़िया था मैंने तो किसी के साथ बुरा नहीं किया मेरे साथ फलां, फलां घटना क्यों हुई? भगवान मेरे साथ ऐसे क्यों हुआ वैसे क्यों हुआ मतलब सिर्फ शिकायत वो भी दूसरों की,,, क्या इसे भक्ति कह सकते है क्या भगवान को नहीं पता आपको पता है इसलिए आप ही बताओगे???? ईश्वर के सामने जाओ तो सिर्फ निर्
pushpavashishtrani
Mar 151 min read
बस "मै"
आज के युग के सबसे बड़े दुख जो हरेक के हिस्से मै आये "मै सबसे बढ़िया दुनियां खराब,"मै सबसे समझदार दुनियां पागल हैं","मै सबसे अच्छा परंतु दूसरे बहुत बुरे हैं", "मै तो बहुत ही सीधा सच्चा दूसरे सब आजकल बहुत चालाक और तेज हैं", मै सबसे खुश रहता हूँ दूसरे सभी हमसे दुखी और हमारे सुखी जीवन से चिढ़ते हैं "😂ये दुख इतने ज्यादा बडे हैं इस युग मै की सुख का अनुभव ही नहीं कर पाता इंसान! दूसरे के चक्कर मै इतना परेशान हैं आज का मानव की अपनी परछाई पर भी भरोसा नहीं है न किसी के साथ हंसी खुशी रह ही
pushpavashishtrani
Mar 151 min read
कवच दुवाओं का
देखा है मैंने कठिन से कठिन दौर और जीवन की कड़ी धुप मै भी ईश्वर का आशीर्वाद और अपनों की दुवाओं को अपने साथ साथ चलते हुए 🥰महसूस किया है सदा अपनों के प्रेम स्नेह भरे अहसासों को हर संकट और कष्ट के समय मै दुवाओं और आशीर्वाद के कवच को रक्षा करते देखा है 🥰कमाया है अपनों का स्नेह, सम्मान और मान करने के साथ सबके लिए दिल मै दया ममता करुणा का और छोटे बड़े सभी की इज्जत करने का अनमोल खजाना ये वो धन है जितना बाँटे उतना कल्प वृक्ष सा बढ़ता ही जाता है,,,,,, लगा लीजिये अपने अपने जीवन मै ये "कल
pushpavashishtrani
May 8, 20251 min read
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