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फल की इच्छा करो या न करो वो कर्म से मिलेगा जरूर

आज के युग की भयावह सच्चाई हैँ बैठे बिठाये बस  सब मिलता जाये न कोई फर्ज निभाना, न अपने कर्म ही करने पड़े, हक़ सारे चाहिए। करने के टाईम पर हमारे सारे फर्ज हम भूल जाते हैँ एक छोड़ो सत्तर बहाने याद आते हैँ पर जब लेने और लूटने की बारी आती हैँ तो लाईन मै सबसे पहले खड़े नज़र आते हैँ!!!ये कैसी रीत चली जगत मै बिन कर्म फल सारे चाहिए। और सबसे बड़ी विडंबना हमें हमारी अंतरात्मा भी झझोड़ती नहीं,,,, कैसे हजम हो जाता हैँ जो बिना फर्ज और कर्म के छीना या मिला। बिना कर्मो के फल की गठरी जो लाद लीं कांधे पर वो प्रभु तो स्वीकार करेंगे नहीं और जगत जब तक चौट्ट -चौट्ट कर निकलवा नहीं लेगा तब तक प्रभु हिसाब नहीं करेंगे क्योंकि यही का यहीं निकलवा कर ही जाने का नियम बनाया हैँ ईश्वर ने। आज के युग की त्रासदी हैँ जन्म देने वाले की भी सेवा मै नहीं सिर्फ धन मै हिस्सा चाहिए,,,, क्या नित नए उदाहरण अपने आने वाली पीढ़ी को दे रहे हैँ और ऊपर से चाहते हैँ की वो आपसी प्रेम और भाई चारे को निभाए परंतु  सोचिये कैसे????? आप और हम अंधे हो सकते हैँ ईश्वर नहीं वो पूरा हिसाब चुकता कर ही वापिस बुलाते हैँ!!!!!!बिन भाव भक्ति पुरी दिखानी हैँ मै भंडारे लगावऊंगा, सतसंग जागरण सब करुँगा परंतु किसी गरीब जरूरत मंद असहाय के लिए नहीं अपने नाते रिश्तेदार और दोस्तों मित्रों के लिए होंगे सारे आयोजन,,,,,,,,, कोई रोगी हैँ, कोई अपना नातेदार ही जरूरतमद हो तो इससे हमें क्या???? जब किसी की तकलीफ, दुःख, परेशानी न दिखे तो ये कैसी भक्ति और पुजा दिखावा क्योंकि प्रभु तो नेकी मै किये कर्म और किसी भूखे के निवाले मै ही  संतुष्ट हो जाते हैँ सारे जगत को खिलाने वाले को कौन से भंडारा चाहिए,, वो जरूरत मंद को देख कर ही नंगे पाँव दौड़े पड़ जाते हैँ ईश्वर हमारे ह्रदय का करुणा, दया, प्रेम सहयोग का जाग्रत भाव ही हैँ वे तो किसी दुःखी की आंसूओ मै, �

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