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बस "मै"

आज के युग के सबसे बड़े दुख जो हरेक के हिस्से मै आये "मै सबसे बढ़िया दुनियां खराब,"मै सबसे समझदार दुनियां पागल हैं","मै सबसे अच्छा परंतु दूसरे बहुत बुरे हैं", "मै तो बहुत ही सीधा सच्चा दूसरे सब आजकल बहुत चालाक और तेज हैं", मै सबसे खुश रहता हूँ दूसरे सभी हमसे दुखी और हमारे सुखी जीवन से चिढ़ते हैं "😂ये दुख इतने ज्यादा बडे हैं इस युग मै की सुख का अनुभव ही नहीं कर पाता इंसान! दूसरे के चक्कर मै इतना परेशान हैं आज का मानव की अपनी परछाई पर भी भरोसा नहीं है न किसी के साथ हंसी खुशी रह ही नहीं पाता हैं ओर अहंम की ओर मैं की विडंबना देखे आज का मानव अपने ही जीवन मै सब होते हुए भी अपनी ही आदत से दुख ढूंढ़ने का आदि सा हो गया हैं दुख के कारण ढूंढ ढूंढ कर आती खुशियाँ भी समेटने से कतराता हैं, जिस ईश्वर ने ये अनमोल जीवन दिया उसका भी शुक्रिया नहीं बस दुनियां कैसे हैं क्यो हैं इसी उधेड़बुन मे समय और सोच जाया करते हैं लोग,,,,, एक ही परिवार मे अपनी ख़ुशी का अलग कोना ढूंढ़ती हैं आज की नई पीढ़ी सबसे ज्यादा अपने हित की बात करने वालो से खीज और चिढ़ होती हैं बस कटपुतली सा जीवन चाहिए सबको खुद कुछ नहीं करना और दुनियां को दिखानी हैं झूठी शान शौकत वाली जिंदगी न पैसे की अहमियत न इंसान की न रिश्ते नातो की बस भीड़ हो जो आपके मुताबिक चले!!!!!!

 
 
 

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